भारत की शिक्षा प्रणाली में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। शिक्षा मंत्रालय आने वाले शैक्षणिक सत्र यानी अप्रैल 2026 से तीसरी से आठवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटेशनल थिंकिंग का पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही नई तकनीकों के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें भविष्य की डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करना है।
स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव संजय कुमार के अनुसार, नई शिक्षा नीति के तहत यह प्रयास किया जा रहा है कि बच्चों को शुरुआती कक्षाओं से ही तकनीकी समझ दी जाए। जिस तरह बच्चों को भाषा और गणित की मूलभूत शिक्षा दी जाती है, उसी तरह अब तकनीकी कौशल को भी शिक्षा का हिस्सा बनाया जाएगा।

नई शिक्षा नीति के तहत शुरू होगा एआई पाठ्यक्रम
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और कौशल आधारित बनाना है। इसी दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। मंत्रालय का मानना है कि भविष्य में अधिकांश नौकरियां और उद्योग तकनीक और एआई से जुड़े होंगे, इसलिए बच्चों को शुरुआती स्तर पर ही इन विषयों से परिचित कराना जरूरी है।
प्रस्तावित योजना के अनुसार तीसरी से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को एआई की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। इस स्तर पर बच्चों को मशीनों की समझ, डेटा का महत्व, लॉजिकल थिंकिंग और डिजिटल तकनीक के उपयोग के बारे में सरल तरीके से सिखाया जाएगा। इस पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया जाएगा कि छोटे बच्चे भी इसे आसानी से समझ सकें।
नौवीं से बारहवीं कक्षा तक एआई बनेगा वैकल्पिक विषय
प्रारंभिक कक्षाओं में एआई की बुनियादी जानकारी देने के बाद उच्च कक्षाओं में इसे एक वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्र अपनी रुचि के अनुसार इस विषय को चुन सकेंगे।
इस स्तर पर छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उन्नत पहलुओं जैसे मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, एल्गोरिदम और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों के बारे में अधिक गहराई से पढ़ाया जाएगा। इससे छात्रों को भविष्य में टेक्नोलॉजी से जुड़े करियर विकल्पों के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी।
बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने की पहल
दुनिया तेजी से डिजिटल युग की ओर बढ़ रही है। आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, कृषि, परिवहन और उद्योग जैसे लगभग हर क्षेत्र में किया जा रहा है। ऐसे में यदि बच्चों को शुरुआती उम्र से ही इस तकनीक की समझ दी जाए तो वे भविष्य में नई संभावनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई की पढ़ाई से बच्चों की समस्या सुलझाने की क्षमता और तार्किक सोच विकसित होगी। इससे वे केवल तकनीक का उपयोग ही नहीं करेंगे बल्कि उसे समझने और विकसित करने में भी सक्षम बनेंगे।
एआई पाठ्यक्रम को अपडेट करने की तैयारी
शिक्षा मंत्रालय ने इस नए पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए उच्च स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों की एक टीम पाठ्यक्रम को अपडेट करने और उसे बच्चों के लिए आसान बनाने पर काम कर रही है।
इसके अलावा शिक्षकों को भी इस विषय को पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे छात्रों को तकनीक से जुड़े विषयों को प्रभावी तरीके से समझा सकें। शिक्षा मंत्रालय का प्रयास है कि यह पाठ्यक्रम केवल सैद्धांतिक न होकर व्यावहारिक और प्रोजेक्ट आधारित भी हो।
डिजिटल इंडिया मिशन को मिलेगा बढ़ावा
स्कूलों में एआई की पढ़ाई शुरू होने से देश के डिजिटल इंडिया मिशन को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे आने वाली पीढ़ी तकनीकी रूप से अधिक सक्षम होगी और भारत को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि भारत के छात्र केवल तकनीक का उपयोग करने वाले ही नहीं बल्कि तकनीक विकसित करने वाले भी बनें। इसी उद्देश्य से शिक्षा प्रणाली में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी कहां देखें
एआई पाठ्यक्रम से जुड़ी नई अपडेट और आधिकारिक जानकारी के लिए छात्र और अभिभावक शिक्षा मंत्रालय या राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संबंधित सरकारी पोर्टल पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। समय-समय पर मंत्रालय द्वारा इस विषय में नई घोषणाएं की जा सकती हैं।
