UP Anganwadi Building News: उत्तर प्रदेश में बनेंगे 76 हजार नए आंगनबाड़ी भवन

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत और सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र का अपना स्थायी भवन हो। इसी उद्देश्य से राज्य में लगभग 76 हजार नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कराने की योजना बनाई जा रही है। इस पहल से न केवल बच्चों को बेहतर प्री-प्राइमरी शिक्षा का माहौल मिलेगा बल्कि गर्भवती महिलाओं और माताओं को भी स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।

UP Anganwadi Building News: उत्तर प्रदेश में बनेंगे 76 हजार नए आंगनबाड़ी भवन

प्रदेश में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र बिना भवन के संचालित

उत्तर प्रदेश में इस समय 1.89 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। ये केंद्र बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे केंद्र हैं जो किराए के भवनों, पंचायत भवनों या अस्थायी स्थानों से संचालित हो रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 76 हजार आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने इन केंद्रों के लिए नए और आधुनिक भवन बनाने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इससे आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।

बच्चों की शुरुआती शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं आंगनबाड़ी केंद्र

तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र शिक्षा की पहली सीढ़ी माने जाते हैं। यहां बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर मिलता है और उन्हें स्कूल जाने के लिए तैयार किया जाता है। साथ ही बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए भी इन केंद्रों में कई योजनाएं चलाई जाती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि बच्चों को शुरुआती उम्र में सही वातावरण और पोषण मिलता है तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। इसी वजह से सरकार इन केंद्रों को सुरक्षित, आकर्षक और बच्चों के अनुकूल बनाने पर जोर दे रही है।

नए भवनों में मिलेंगी आधुनिक और जरूरी सुविधाएं

प्रस्तावित आंगनबाड़ी भवनों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा ताकि बच्चों और महिलाओं को सभी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकें। इन भवनों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, बिजली की सुविधा और बच्चों के लिए सुरक्षित शौचालय बनाए जाएंगे।

इसके अलावा भवनों में किचन शेड की व्यवस्था भी होगी ताकि बच्चों के लिए पोषण आहार आसानी से तैयार किया जा सके। छोटे बच्चों को ध्यान में रखते हुए लो-हाइट वॉश यूनिट बनाए जाएंगे जिससे वे आसानी से हाथ धो सकें।

इन केंद्रों में बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित खेल क्षेत्र भी तैयार किया जाएगा। साथ ही गर्भवती महिलाओं और माताओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था की जाएगी। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कई भवनों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और पोषण वाटिका विकसित करने की योजना भी शामिल है।

निर्माण के लिए सीएसआर से भी लिया जाएगा सहयोग

राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी यानी CSR के तहत कंपनियों से सहयोग लेने का भी निर्णय लिया है। यदि आवश्यकता पड़ती है तो राज्य सरकार अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराएगी।

सरकार का उद्देश्य है कि निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू हो और तय समय सीमा में पूरा किया जा सके ताकि बच्चों और महिलाओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल अपनाने पर जोर

भवन निर्माण को तेजी से पूरा करने के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल अपनाने का सुझाव दिया गया है। इस तकनीक में भवन के कई हिस्से पहले से तैयार किए जाते हैं और बाद में साइट पर उन्हें जोड़कर निर्माण पूरा किया जाता है। इससे समय की बचत होती है और निर्माण कार्य जल्दी पूरा हो सकता है।

इसके साथ ही आंगनबाड़ी भवनों के लिए एक मानक डिजाइन तैयार करने की भी योजना है ताकि सभी केंद्रों में सुविधाएं समान रूप से उपलब्ध हो सकें।

स्कूल परिसरों में भी बन सकते हैं आंगनबाड़ी केंद्र

सरकार ने यह भी सुझाव दिया है कि जहां संभव हो वहां प्राथमिक विद्यालयों के परिसर में ही आंगनबाड़ी भवन बनाए जाएं। इससे बच्चों को शुरुआती शिक्षा से लेकर स्कूल तक का संक्रमण आसान हो सकेगा।

यदि आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूल एक ही परिसर में होंगे तो शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी। इससे अभिभावकों और बच्चों दोनों को सुविधा मिलेगी।

महिलाओं और बच्चों के लिए बड़ी राहत

आंगनबाड़ी केंद्रों के नए भवन बनने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे पोषण कार्यक्रमों का बेहतर संचालन होगा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी बढ़ेगी।

इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी काम करने के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।